Autommobile feild में आजकल सबसे hot topic selfdriving cars है, जिसके बारे में अलग अलग लोगों के भिन्न मत है। फ़िलहाल इस पर  जो companies रिसर्च कर रही है वो है, Google, Uber, Tesla, Nisan और अन्य प्रमुख ऑटोमोटर्स, शोधकर्ताओं और प्रौद्योगिकी कंपनियों द्वारा विभिन्न selfdriving तकनीकों का विकास किया गया है।

selfdriving cars काम कैसे करती है।

सारी गाड़ियों की अलग अलग डिज़ाइन विवरण होने के बावजूद अधिकांश सेल्फड्रॉविंग कार्स में इसके काम करने का सिस्टम सामान्य है। ये सब  सिस्टम रडार जैसे सेंसर की विस्तृत श्रृंखला के आधार पर अपने परिवेश के internal map को बनाते हैं। Uber के selfdriving cars प्रोटोटाइप अपने आंतरिक मानचित्र बनाने के लिए, अन्य सेंसर के साथ, साठ-चार लेजर बीम का उपयोग करते है।

वही Google के द्वारा बनाया गया प्रोटोटाइप, विभिन्न चरणों में, लेजर, रडार, उच्च शक्ति वाले कैमरे और सोनार का इस्तेमाल करते हैं।

self driving cars maping

डाटा कलेक्ट करने के बाद, सॉफ़्टवेयर तब उन इनपुट को संसाधित करता है और रास्ता बनाता है, फिर वो वाहन के “acquator” को निर्देश भेजता है, Acquator का काम है तुरंत ब्रेक लगाना और स्टीयरिंग को नियंत्रित करना । hard-coded नियम, बाधा से बचने वाले algorithm, पूर्वानुमानित सिटी  मॉडलिंग, और “स्मार्ट” ऑब्जेक्ट का भेदभाव (यानी, साइकिल और मोटरसाइकिल के बीच अंतर जानने) करने वाली सॉफ़्टवेयर को यातायात नियमों का पालन करने और बाधाओं को नेविगेट करने में सहायता करता है।

आंशिक रूप से self driving वाहनों को मानव ड्राइवर को हस्तक्षेप करने की आवश्यकता हो सकती है यदि सिस्टम अनिश्चितता का सामना करता है; पूरी तरह से self driving वाहन एक स्टीयरिंग व्हील भी पेश नहीं कर सकते हैं।

self driving कारों को “कनेक्ट” या नहीं होने के रूप में और अधिक विशिष्टता दी जा सकती है, यह दर्शाता है कि क्या वे अगली पीढ़ी यातायात रोशनी जैसे अन्य वाहनों और / या बुनियादी ढांचे के साथ संवाद कर सकते हैं। अधिकांश प्रोटोटाइप में वर्तमान में यह क्षमता नहीं है।

फ़िलहाल सेल्फ ड्राइविंग कार्स प्रोटो तितपे के रूप में America, Singapoor, Greece, Sweden and Amstradam जैसे देशों में चल रही है, पर इसके ऊपर अभी रिसर्च चल रही है और इसके artificial intelegence को और इम्प्रूव करने पे भी काम किया जा रहा है। अभी इन कार्स में ड्राइवर होते है जो किसी भी आटोमेटिक फेलियर होने पर गाड़ी को accident  से बचा सके।

 

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